मर्दों की 'बदचलन दुनिया' की रानी थी गंगूबाई, ये है करीम लाला और Gangubai Kathiawadi की असली कहानी

Bollywood News in Hindi, बॉलीवुड न्यूज़, Hindi Movies News, हिंदी मूवीज़ समाचार, फिल्मी खबरें | Navbharat Times
Hindi Movies & Bollywood News in Hindi, बॉलीवुड न्यूज़: हिंदी फिल्म जगत की ताज़ा ख़बरें, मनोरंजन, अभिनेताओं और अभिनेत्रियों से जुड़ीं न्यूज़ सबसे पहले और सटीक नवभारत टाइम्स पर। 
मर्दों की 'बदचलन दुनिया' की रानी थी गंगूबाई, ये है करीम लाला और Gangubai Kathiawadi की असली कहानी
Feb 4th 2022, 08:18

'गंगूबाई काठ‍ियावाड़ी' () का नया ट्रेलर आपने देख लिया होगा। संजय लीला भंसाली की इस फिल्‍म के ट्रेलर ने ही रोंगटे खड़े कर दिए हैं। 'मुर्दाबाद' के नारों के बीच जब गंगूबाई बनी आलिया भट्ट () की बेखौफ एंट्री होती है तो उनके और दमदार डायलॉग के अलावा और कुछ दिखाई-सुनाई नहीं देता। इस फिल्‍म की कहानी मुंबई 'माफिया क्‍वीन' कही जाने वाली गंगूबाई कोठेवाली की असल कहानी पर बेस्‍ड है। वो गंगूबाई जो बेखौफ थी। उस दुनिया पर राज करती थी, जिसमें औरतों के खड़े होने पर ही उसे बदचलन कहने लगते हैं। लेकिन गंगूबाई से सब प्‍यार करते थे, उसका सम्‍मान करते थे। इसलिए कहते थे गंगूबाई काठ‍ियावाड़ी। गंगू की मर्जी के बिना कमाठीपुरा में नहीं होती थी शाम मुंबई अंडरवर्ल्‍ड (Mumbai Underworld) की दुनिया में गंगूबाई ऐसा नाम है, जिसके कोठे पर बिना उसकी मर्जी के बिना बड़े से बड़ा गैंगस्‍टर भी कदम नहीं रखता था। वह सेक्‍स वर्कर्स के हित में भी काम करती थी और उनके लिए भी। गंगूबाई के कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आजाद मैदान में उसके भाषण को 60 के दशक में हर बड़े अखबार ने जगह दी थी। ट्रेलर के आख‍िर में आपने वो सीन और डायलॉग जरूर देखा होगा, जहां गंगूबाई कहती है, 'कल लिख देना अखबार में कि आजाद मैदान में गंगूबाई ने आंखें झुकाकर नहीं, आंखें मिलाकर अपने हक की बात की है।' औरत शक्‍त‍ि, सदबुद्ध‍ि और संपत्त‍ि तीनों है फिर... गंगूबाई की कहानी जानने के लिए पहले उसे समझना भी जरूरी है। कहते हैं कि अपराध के दलदल कोई भी अपनी मर्जी से नहीं उतरता। उसे बुराई की ओर ढकेलती है, उसकी जिंदगी, उसके साथ हो रहा अन्‍याय। खासकर तब जब गंगूबाई चीखकर यह कहती है- अरे जब शक्‍त‍ि, सदबुद्ध‍ि और संपत्त‍ि... तीनों ही औरतें हैं तो इन मर्दों को किस बात का गुरूर। धोखे और शोषण ने गंगा को बनाया गंगूबाई'गंगूबाई काठियावाड़ी' (Gangubai Kathiawadi) मशहूर पत्रकार और लेखक एस हुसैन जैदी (S Hussain Zaidi) की किताब 'माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई' (Mafia Queens of Mumbai) पर बेस्‍ड है। गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास था। लेकिन धोखे और शोषण ने इस पवित्र गंगा से उसकी मासूमियत छीन ली। गुजरात की गंगा हरजीवनदास (Ganga Harjivandas) कब गंगूबाई बन गई, न उसे पता चला और न ही दुनिया को इसकी खबर हुई। वह मुंबई के सबसे नामचीन वेश्‍यालय की मालकिन बन गई। जिस पुलिस, समाज और गैंगस्‍टर्स ने कभी उसके साथ बुरा किया, वह उन सब के बीच पालथी मारकर बैठ गई। ऐलान कर दिया कि है हिम्‍मत तो बिना मर्जी के आकर दिखाए। गुजरात के काठवाड़ी की रहने वाली थी गंगागंगा हरजीवनदस गुजरात के काठीवाड़ की रहने वाली थी। इसलिए उसे बाद में गंगूबाई काठ‍ियावाड़ी पुकारने लगे थे। एक संपन्‍न परिवार में पैदा हुई गंगा का सपना था कि वह बड़ी होकर ऐक्‍ट्रेस बने। मां-बाप ने बेटी को बड़े प्‍यार से पाला था। लेकिन कॉलेज के दिनों में गंगा को प्‍यार हो गया। प्‍यार गलत नहीं था, लेकिन 16 साल की उम्र में उसे जिससे प्‍यार हुआ, वह गलत था। यह गंगा की जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई। गंगा को उसके पिता के अकाउंटेंट रमनिक लाल से इश्‍क हुआ था। परिवार वाले इसके ख‍िलाफ थे। गंगा को ऐक्‍ट्रेस भी बनना था। इसलिए वह रमनिक के साथ भागकर मुंबई आ गई। मुंबई में पति ने 500 रुपये में कोठे पर बेच दियागंगा और रमनिक ने शादी कर ली। लेकिन अभी गंगा मुंबई की चकाचौंध को निहार ही रही थी कि दरिंदे पति रमनिक लाल ने उसे महज 500 रुपये में कमाठीपुरा के एक वेश्‍यालय को बेच दिया। लाचार और मासूम गंगा के जिस्‍म का हर दिन सौदा होने लगा। दिन और रात आंसुओं में बीतने लगे। वह रोती थी। बिलखती थी। खुद को और अपने प्‍यार को कोसती थी। गंगा की जिंदगी में करीम लाला की एंट्रीकमाठीपुरा में साठ के उस दशक में माफिया डॉन करीम लाला () का सिक्‍का चलता था। फिल्‍म में यह किरदार अजय देवगन () निभा रहे हैं। करीम लाल गुंडा जरूर था, लेकिन नेक‍ दिल था। ट्रेलर में आपने डायलॉग सुना होगा, 'लाला को घर बसते हुए देखना पसंद है, उजड़ते हुए नहीं।' एक बार की बात है। करीम लाला के एक गुंडे की नजर गंगा पर पड़ी। उस वहशी ने गंगा का रेप किया। गंगा इंसाफ मांगने करीम लाला के पास गई और करीम लाला ने न सिर्फ इंसाफ किया, बल्‍क‍ि गंगा को अपनी मुंहबोली बहन मान लिया। इसके बाद गंगा की जिंदगी बदल दी और यहीं से गंगा के गंगूबाई काठ‍ियावाड़ी बनने की कहानी शुरू हुई। गंगा बन गई गंगू मां, बनी सेक्‍स वर्कर्स की आवाजकरीम लाला की बहन बनने के बाद कमाठीपुरा में गंगूबाई का कद बढ़ गया। वह अब कोठेवाली गंगूबाई बन गई। कमाठीपुरा की पूरी कमान भी अब गंगूबाई के हाथ में आ गई। कोठा चलाना गंगूबाई का काम था। लेकिन वह नेकदिल थी, इसलिए सेक्स वर्कर्स के लिए वह 'गंगू मां' थी। बताया जाता है कि गंगूबाई ने अपने वेश्‍यालय में कभी किसी लड़की के साथ जबरदस्‍ती नहीं होने दी। वह उसी को कोठे पर रखती, जो अपनी मर्जी से आती थी। गंगूबाई सेक्स वर्कस के अधिकारों के लिए एक आवाज बन गईं। गंगूबाई की धमक ऐसी थी कि उसकी बिना इजाजत कोई भी गैंगस्‍टर या बड़े से बड़ा माफिया कोठे या कमाठीपुरा में कदम नहीं रखता था। अनाथ बच्‍चों का सहारा, पंडित नेहरू से हुई थी मुलाकातगंगूबाई ने अपने जीवन में न सिर्फ सेक्‍स वर्कर्स के लिए काम किया, बल्‍कि अनाथ बच्‍चों के लिए भी सहारा बनी। गंगूबाई ने कई बच्चों को गोद लिया। ये बच्चे या तो अनाथ थे या बेघर। इन बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी गंगूबाई की थी। गंगूबाई ने सेक्‍स वर्कर्स के अध‍िकार और हितों के लिए अपनी आवाज खूब बुलंद की। मुंबई के आजाद मैदान में सेक्स वर्कर्स के हक में गंगूबाई का भाषण वहां के हर छोटे-बड़े अखबारों की सुर्ख‍ियां बनीं। हुसैन जैदी की किताब में जिक्र है कि गंगूबाई उस वक्‍त देश के प्रधानमंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू से भी मिली थीं।

You are receiving this email because you subscribed to this feed at blogtrottr.com.

If you no longer wish to receive these emails, you can unsubscribe from this feed, or manage all your subscriptions.
Previous Post Next Post

Contact Form